यह एक वीडियो देखा ... देख कर दिल दहल गया... रूह काँप गई... यह  वीडियो इस्लामिक कट्टरपंथियों की बर्बरता को दिखाता है... क्या फायदा ऐसे मुसलमान होने का... ? जो किसी इन्सान को जानवर की क़त्ल कर दें... सिर्फ इतनी सी बात पर ... की उस पर जासूस होने का शक़ था... इन जैसे मुसलमानों ने ही इस्लाम को बदनाम कर रखा है और इस्लाम के नाम पर सिर्फ दहशत फैला रखी है... अगर यह जासूस था भी ... तो क्या ऐसे क़त्ल कर देना जायज़ है? मैंने भी इस्लाम को  पढ़ा है ...जाना है ... समझा है... पर कहीं मुझे इस तरह क़त्ल किये जाने की व्याख्या नहीं मिली है... लानत है ऐसे मुसलमानों पर...

प्लीज़ यह वीडियो... कमज़ोर दिल वाले ना देखें... हार्ट फेल होने का डर है....

14 comments:

  • महफूज भाई ये वीडियो मैंने आज से तीन साल पहले देखि थी . मेरे एक मुस्लिम मित्र ने इस वीडियो को दिखाया था, तब मैंने भी वही गली दी थी जो आपने दी. लेकिन पता है में दो दिन तक खाना नहीं खा सका, और जब दिमाग ये वीडियो घुमती थी तो समझिये कि दिमाग कि दही बन जाती थी.

    ये कतई मुस्लमान नहीं हो सकते , मुस्लमान के नाम पर ये कलंक है और आप ने सच कहा है कि इनलोगों ने इस्लाम कि तस्वीर बिगाड़ रखी है.

  • aapne to islaam padaa hai, jana hai, samjha hai, lekin uske baad bhi aapke blogs aur vichaaro mai kahi bhi islaam ki jhalak nahi milti ....to aap inse kaise umeed kar sakte hai jinhone islaam padaa hi nahi...janna aur samjhnaa to door ki baat hai

  • Mahfooz Bhai, Salaam arz hai !

    आ गये न आप भी मीडिया क्रिएशन के चक्कर में! वो (अमेरिका एंड पार्टी) खुद ऐसा वीडियो बनाते हैं और प्रकशित प्रचारित करते हैं......

    मजाल है वो सब नेट पर आ जाए जो वैश्विक स्तर पर मुस्लिम जगत के हित में हो, वो उसको फ़ौरन ही बैन कर देंगे... ताज़ा तरीन उदहारण एम् बी बी एस धारक भारतीय डॉ ज़ाकिर नाइक साहब कको बैन करने का ! जिसका विरोध स्वयं भारतीय हिन्दुओं ने भी किया है !!! यकीन नहीं तो यहाँ देखें !!


    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2010/07/blog-post_3924.html

    (please remove da world verification)

  • इस तरह का कृत्य अगर हिन्दू करे या मुसलमान करे वह इंसान नही है

  • मैं तो दहशतगर्दी के सीन देखती भी नही। पता नहीं क्‍या हो गया है? कैसी दुनिया बनाना चाहते हैं ह‍म? बस हम कुछ लोग एक परिवार बनाने का प्रयास करें, यही समाधान है।

  • वीडियो नहीं देखा. जिगर चाहिए.

    भटके हुए मासूम लोग है. इन्हे माफ कर दिजीये. गरीबी अशिक्षा व अत्याचार के मारे है. आतंकवाद का कोई महजब नहीं होता अतः इन्हे मुसलमान न कहें.

  • महफ़ूज़ भाई,
    देख लिया ये वीडियो। इतनी ही है आदमी की जिन्दगी और मौत के बीच की दूरी - ०.28 sec. to 0.43 seconds में यानि १५ सैकंड्स में ही ऊपर वाले के बनाये बंदे को गाजर मूली की तरह काट डाला गया।
    आपको भी अपनी पोस्ट में इन्हें मुसलमान की जगह इंसान लिखना चाहिये था। ये जानवर हैं, इंसान कहलाने लायक ही नहीं हैं, किसी भी धर्म के मानने वाले कैसे हो सकते हैं?

  • @ raj bhatia जी....

    जी वो विडिओ मैंने ही डाला था ... बाद में उसे हटा दिया वहां से ...क्यूंकि उसे मैंने अपने मैं ईमेल से डाला था... जिसे गूगल डिलीट कर सकता है और मेरा अकाउंट बंद भी कर सकता है... इसलिए हटा दिया है... और फिर से उसे दूसरे ईमेल से अपलोड किया है.... अब चल रहा है.... वैसे विडिओ आपके मेल भी कर रहा हूँ....

  • मैं नहीं देख सकूँगी इस विडियो को ...
    जो भी है ...बर्बरता की मिसाल है...
    सिर्फ कमेन्ट कर रही हूँ...आपने जब डाला है तो ठीक होगा...विश्वास है मुझे...

  • यद्यपि साक्षरता से मानवता की अनिवार्य प्राप्ति के प्रमाण नहीं हैं,तथापि इस प्रकार की बर्बरता के लिए अशिक्षा को काफी हद तक ज़िम्मेदार माना जा सकता है। मनुष्य का लगातार अधार्मिक होता जाना मानव-जाति को न जाने किधर ले जाएगा।